हस्त नक्षत्र
हस्त तेरहवाँ नक्षत्र है, जो कन्या राशि में 10° से 23°20′ तक फैला है। जन्म के समय चंद्रमा यहाँ हो तो हस्त आपका जन्म नक्षत्र है। यह हाथ का नक्षत्र है: हुनर, कारीगरी, हँसमुख स्वभाव और विचारों को उपयोगी काम में बदलने की क्षमता।
एक नज़र में
- राशि
- कन्या
- विस्तार
- 10° कन्या – 23°20′ कन्या
- स्वामी ग्रह (दशा)
- चंद्र
- देवता
- सूर्य
- प्रतीक
- हाथ
- गण
- देव गण
- नाड़ी
- वात
- योनि
- भैंस
- लिंग
- स्त्री
- शुभ दिशा
- दक्षिण
- रंग
- गहरा हरा
- रत्न
- मोती रत्न
चार पद
- पद 110°–13°20′ कन्यानवांश मेषनाम का अक्षर: पू
- पद 213°20′–16°40′ कन्यानवांश वृषभनाम का अक्षर: ष
- पद 316°40′–20° कन्यानवांश मिथुननाम का अक्षर: ण
- पद 420°–23°20′ कन्यानवांश कर्कनाम का अक्षर: ठ
हस्त का अर्थ
हस्त का सीधा अर्थ है ‘हाथ’, और इसके पाँच तारे हाथ की पाँच उँगलियों जैसे माने जाते हैं। हाथ से ही हम रचते हैं, देते हैं, आशीर्वाद देते हैं, उपचार करते हैं और कमाते हैं। इसलिए हस्त हर तरह के हुनर से जुड़ा है, लेखन और चित्रकारी से लेकर सर्जरी और व्यापार तक।
इसका स्वामी चंद्रमा है और यह बुध की राशि कन्या में आता है, जहाँ बुध उच्च का होता है। इससे हस्त में संवेदनशील मन और व्यावहारिक बुद्धि दोनों मिलते हैं: चतुर, लचीला और बारीकियों में कुशल।
सविता देव और खुला हाथ
हस्त के देवता सविता हैं, सूर्य की वह रचनात्मक शक्ति जो जगाती और प्रेरणा देती है। गायत्री मंत्र इन्हीं सविता देव को संबोधित है: ‘तत्सवितुर्वरेण्यं’, यानी हम सविता के श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें। इसी कारण कई सूचियों में हस्त के देवता सूर्य लिखे जाते हैं।
वेदों में सविता को सुनहरे हाथों वाला बताया गया है, जो हर सुबह हाथ उठाकर संसार को आशीर्वाद देते हैं। इसलिए हस्त के जातकों के हाथों में अक्सर कोई विशेष कला होती है और वे व्यावहारिक काम से दूसरों के जीवन में रोशनी और मदद पहुँचाते हैं।
स्वभाव और व्यक्तित्व
हस्त के जातक कुशल, हाज़िरजवाब और मेहनती होते हैं। समस्याएँ सुलझाना इन्हें पसंद है, ये कोई भी हुनर जल्दी सीख लेते हैं और इनका सेंस ऑफ़ ह्यूमर अच्छा होता है। देव गण इन्हें दयालु और मददगार बनाता है; ये आसानी से मित्र बनाते हैं और मेल-जोल बनाए रखते हैं।
चंद्रमा के प्रभाव से कभी ये बेचैन या परिणाम को लेकर चिंतित हो सकते हैं, और कन्या की पूर्णता की चाह इन्हें खुद के प्रति कठोर बना सकती है। नियमित दिनचर्या, प्रार्थना और पूरे किए काम पर संतोष इन्हें स्थिर और आत्मविश्वासी बनाता है।
हस्त नक्षत्र के चार पद
पहला पद (मेष नवांश): ऊर्जावान और उद्यमी, हाथ और विचार दोनों में तेज़।
दूसरा पद (वृषभ नवांश): व्यावहारिक और कलात्मक, धन, शिल्प और सौंदर्य में अच्छे।
तीसरा पद (मिथुन नवांश): सबसे संवादप्रिय पद; शब्दों, लेखन, व्यापार और हास्य में चतुर।
चौथा पद (कर्क नवांश): देखभाल करने वाले और अंतर्ज्ञानी, उपचार, खाना बनाने और परिवार की भलाई में रुचि।
करियर और धन
हस्त उन कामों में अच्छा करता है जिनमें हाथ या हुनर लगे: सर्जरी, दंत चिकित्सा, फ़िज़ियोथेरेपी, आयुर्वेद, हस्तशिल्प, कला, डिज़ाइन, सिलाई, लेखन, अकाउंटेंसी, डेटा का काम, जादू और मंच प्रदर्शन, तथा व्यापार। कई लोग अच्छे हस्तरेखा विशेषज्ञ और ज्योतिषी भी बनते हैं।
ये पैसों के मामले में सावधान रहते हैं और अपनी मेहनत से कमाना पसंद करते हैं। हुनर से होने वाली नियमित आय वर्षों में अच्छी तरह बढ़ती है।
विवाह और उपाय
प्रेम में हस्त ध्यान रखने वाला और खुशमिज़ाज होता है और छोटे-छोटे व्यावहारिक कामों से स्नेह दिखाता है। विवाह मुहूर्त के लिए भी हस्त शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। इसकी महिष (भैंस) योनि है, जिसका मेल महिष योनि से अच्छा और अश्व (घोड़ा) योनि से विरोधी माना जाता है; आदि (वात) नाड़ी होने से कुंडली मिलान में अलग नाड़ी का साथी बेहतर है।
उपाय के लिए सूर्योदय के समय गायत्री मंत्र का जाप करें, सूर्य को जल दें और ‘ॐ सवित्रे नमः’ का जाप करें। सोमवार को भगवान शिव या माता पार्वती की पूजा और चावल, दूध या सफ़ेद वस्त्र का दान शुभ है। मोती चंद्रमा का रत्न है, पर कोई भी रत्न पहनने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।
आपकी राशि और नक्षत्र क्या है?
एक मिनट में अपनी जन्म कुंडली मुफ़्त बनाइए। आपको अपनी चंद्र राशि, नक्षत्र, लग्न और चल रही दशा दिखेगी।
मेरी मुफ़्त कुंडली बनाइएलोग अक्सर पूछते हैं
हस्त नक्षत्र का स्वामी कौन है?
हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है और देवता सविता (सूर्य का रचनात्मक रूप) हैं। इसमें जन्म होने पर चंद्रमा की महादशा से जीवन शुरू होता है।
हस्त नक्षत्र किस राशि में आता है?
हस्त नक्षत्र के चारों पद कन्या राशि में 10° से 23°20′ तक आते हैं।
हस्त नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
हस्त के अक्षर पू, ष, ण और ठ हैं, पहले से चौथे पद के लिए। जैसे पूजा, पूनम या पुष्पा; ष, ण और ठ के लिए आमतौर पर श, न और ट जैसी मिलती-जुलती ध्वनि ली जाती है।
हस्त नक्षत्र का प्रतीक क्या है?
हस्त का प्रतीक खुला हाथ है, जो हुनर, कारीगरी, दान और आशीर्वाद को दर्शाता है।