रोहिणी नक्षत्र
रोहिणी चौथा नक्षत्र है, जो वृषभ राशि में 10° से 23°20′ तक फैला है। जन्म के समय चंद्रमा यहाँ हो तो रोहिणी आपका जन्म नक्षत्र है। यह विकास, सौंदर्य और समृद्धि का नक्षत्र है, और कहा जाता है कि चंद्रमा को यह सबसे अधिक प्रिय है।
एक नज़र में
- राशि
- वृषभ
- विस्तार
- 10° वृषभ – 23°20′ वृषभ
- स्वामी ग्रह (दशा)
- चंद्र
- देवता
- ब्रम्हा
- प्रतीक
- रथ
- गण
- मनुष्य गण
- नाड़ी
- कफ
- योनि
- सांप
- लिंग
- स्त्री
- शुभ दिशा
- पूर्व
- रंग
- सफेद
- रत्न
- मोती रत्न
चार पद
- पद 110°–13°20′ वृषभनवांश मेषनाम का अक्षर: ओ
- पद 213°20′–16°40′ वृषभनवांश वृषभनाम का अक्षर: वा
- पद 316°40′–20° वृषभनवांश मिथुननाम का अक्षर: वी
- पद 420°–23°20′ वृषभनवांश कर्कनाम का अक्षर: वू
रोहिणी का अर्थ
रोहिणी का अर्थ है ‘लाल रंग वाली’ या ‘बढ़ने वाली’। आकाश में यह लालिमा लिए तारा एल्डेबरान है। नाम में उपजाऊ मिट्टी में अंकुरित होते बीज का भाव है, इसलिए रोहिणी खेती, गौपालन, बाग़-बगीचे और हर उस चीज़ से जुड़ा है जो देखभाल से बढ़ती है।
इसका स्वामी चंद्रमा है, और वृषभ राशि में चंद्रमा विशेष रूप से बलवान होता है। इसलिए रोहिणी में चंद्रमा मन को शांत, संवेदनशील और सुंदरता की ओर आकर्षित बनाता है।
ब्रह्मा जी, चंद्रदेव और रथ
रोहिणी के देवता ब्रह्मा जी (प्रजापति) हैं, जो सृष्टि के रचयिता हैं। इसलिए यह रचना और निर्माण का नक्षत्र है: विचारों को ठोस रूप देना। इसका प्रतीक रथ या बैलगाड़ी है, जो फ़सल को घर तक लाती है।
पुराणों के अनुसार दक्ष प्रजापति की 27 कन्याएँ, यानी 27 नक्षत्र, चंद्रदेव से ब्याही गई थीं, और चंद्रमा रोहिणी से सबसे अधिक प्रेम करते थे। बाकी बहनों की शिकायत पर दक्ष ने चंद्रमा को क्षय का शाप दिया, और भगवान शिव ने उसे कम किया, जिससे चंद्रमा फिर बढ़ने लगे। परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।
स्वभाव और व्यक्तित्व
रोहिणी के जातक आमतौर पर आकर्षक, मृदुभाषी और कलाप्रेमी होते हैं। इन्हें अच्छा भोजन, सुंदर वस्त्र, संगीत और प्रकृति पसंद है। ये धैर्यवान होते हैं और चीज़ों को धीरे पर मज़बूती से बनाते हैं; लोग इनके पास सहज महसूस करते हैं। मनुष्य गण इन्हें परिवार और सांसारिक लक्ष्यों से जोड़े रखता है।
सुख-सुविधा का प्रेम कभी लोगों या चीज़ों के प्रति अधिकार भाव या बदलाव से बचने की आदत बन सकता है। थोड़ा लचीलापन और बाँटने की आदत समृद्धि को बहता हुआ रखती है।
रोहिणी नक्षत्र के चार पद
पहला पद (मेष नवांश): बाकी पदों से अधिक सक्रिय और महत्वाकांक्षी, नए काम जल्दी शुरू करने वाले।
दूसरा पद (वृषभ नवांश): रोहिणी का सबसे गहरा रूप; स्थिर, सौंदर्यप्रेमी और धन व परिवार पर केंद्रित।
तीसरा पद (मिथुन नवांश): हाज़िरजवाब और अभिव्यक्ति में कुशल, व्यापार, मीडिया और कला में अच्छे।
चौथा पद (कर्क नवांश): भावुक, पालन-पोषण करने वाले, घर और माँ से गहरा लगाव तथा अच्छा अंतर्ज्ञान।
करियर और धन
रोहिणी रचनात्मक और उत्पादक कामों में चमकता है: खेती, डेयरी, खाद्य व्यवसाय, होटल, फ़ैशन, आभूषण, सौंदर्य प्रसाधन, इंटीरियर डिज़ाइन, संगीत, फ़िल्म और ललित कलाएँ। चंद्रमा के कारण नर्सिंग, काउंसलिंग और लोगों से जुड़े काम भी अनुकूल हैं; रियल एस्टेट और बैंकिंग में भी कई लोग सफल होते हैं।
ये बचत करते हैं, संपत्ति रखना पसंद करते हैं और आर्थिक सुरक्षा चाहते हैं। इनका धन जोखिम से नहीं, धैर्य से बढ़ता है।
विवाह और उपाय
विवाह में रोहिणी रोमांटिक, वफ़ादार और देखभाल करने वाला होता है और शांत, सुंदर घर चाहता है। विवाह मुहूर्त के लिए भी रोहिणी शुभ माना जाता है। इसकी सर्प योनि है, जिसका मेल दूसरी सर्प योनि से अच्छा और नकुल (नेवला) योनि से विरोधी माना जाता है। अंत्य (कफ) नाड़ी होने से अलग नाड़ी का साथी बेहतर रहता है।
उपाय के लिए सोमवार को भगवान शिव या माता पार्वती की पूजा करें, शिवलिंग पर दूध या जल चढ़ाएँ और ‘ॐ सोमाय नमः’ या ‘ॐ ब्रह्मणे नमः’ का जाप करें। घर में पौधे लगाना और गाय की सेवा करना भी शुभ है। मोती चंद्रमा का रत्न है, पर कोई भी रत्न पहनने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
आपकी राशि और नक्षत्र क्या है?
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रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है और देवता ब्रह्मा जी हैं। इस नक्षत्र में जन्म होने पर चंद्रमा की महादशा से जीवन शुरू होता है।
रोहिणी नक्षत्र किस राशि में आता है?
रोहिणी नक्षत्र के चारों पद वृषभ राशि में 10° से 23°20′ तक आते हैं।
रोहिणी नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
रोहिणी के अक्षर ओ, वा, वी और वू हैं, पहले से चौथे पद के लिए। जैसे ओम, वरुण, विद्या या वृंदा।
रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का प्रिय क्यों कहते हैं?
पौराणिक कथा में चंद्रदेव अपनी 27 पत्नियों में रोहिणी से सबसे अधिक प्रेम करते थे। ज्योतिष में भी वृषभ राशि में चंद्रमा बलवान होता है, इसलिए रोहिणी का चंद्रमा शुभ और सौम्य माना जाता है।
क्या रोहिणी नक्षत्र विवाह के लिए शुभ है?
रोहिणी प्रेमपूर्ण, परिवार-प्रिय नक्षत्र माना जाता है और विवाह मुहूर्त में भी इसका प्रयोग होता है। वास्तविक मेल पूरे कुंडली मिलान से ही देखा जाता है।