ज्येष्ठा नक्षत्र
ज्येष्ठा अठारहवाँ नक्षत्र है, जो वृश्चिक राशि में 16°40′ से 30°00′ तक फैला है। ज्येष्ठा का अर्थ है ‘सबसे बड़ा’, और जन्म नक्षत्र के रूप में यह ऐसा व्यक्ति देता है जो स्वाभाविक रूप से ज़िम्मेदारी उठाता है और दूसरों की रक्षा करता है।
एक नज़र में
- राशि
- वृश्चिक
- विस्तार
- 16°40′ वृश्चिक – 30° वृश्चिक
- स्वामी ग्रह (दशा)
- बुध
- देवता
- इंद्र
- प्रतीक
- कुंडल (कान की बाली)
- गण
- राक्षस गण
- नाड़ी
- वात
- योनि
- हरिण
- लिंग
- पुरुष
- शुभ दिशा
- पश्चिम
- रंग
- क्रीम रंग
- रत्न
- पन्ना रत्न
चार पद
- पद 116°40′–20° वृश्चिकनवांश धनुनाम का अक्षर: नो
- पद 220°–23°20′ वृश्चिकनवांश मकरनाम का अक्षर: या
- पद 323°20′–26°40′ वृश्चिकनवांश कुंभनाम का अक्षर: यी
- पद 426°40′–30° वृश्चिकनवांश मीननाम का अक्षर: यू
ज्येष्ठा का अर्थ, देवता और प्रतीक
ज्येष्ठा का अर्थ है ‘सबसे बड़ा’ या ‘वरिष्ठ’, और इससे जुड़ा तारा वृश्चिक का चमकीला लाल हृदय (एंटारेस) है। इसके देवता इंद्र हैं, देवताओं के राजा। इंद्र की कथाएँ साहस और नेतृत्व की हैं, पर साथ ही बार-बार अपने सिंहासन की रक्षा करने की भी। ज्येष्ठा जातक यह बात समझते हैं: अधिकार इनके पास आता है, और उसके साथ खुद को साबित करते रहने की ज़रूरत भी।
इसका प्रतीक कुंडल (कान की बाली) या गोल रक्षा कवच है, और कुछ ग्रंथ छत्र का भी उल्लेख करते हैं। कुंडल पद और प्रतिष्ठा का आभूषण है, और छत्र अपने नीचे वालों को छाया देता है। दोनों ही रक्षा, सम्मान और उस बड़े भाई-बहन की गरिमा की बात करते हैं जो पूरे परिवार का ध्यान रखता है।
स्वभाव और व्यक्तित्व
ज्येष्ठा में जन्मे लोग बुद्धिमान, साधन संपन्न और भीतर से स्वाभिमानी होते हैं। नक्षत्र स्वामी बुध तेज़ तर्क और चतुर वाणी देता है, और वृश्चिक की तीव्रता गहराई और टिके रहने की ताकत देती है। ये हालात को जल्दी भाँप लेते हैं और लोग इन पर भरोसा करके अपने राज़ बताते हैं।
राक्षस गण होने से इच्छाशक्ति प्रबल होती है और ये आसानी से हार नहीं मानते। कभी-कभी ऊँचाई पर अकेलापन लग सकता है या मदद माँगना कठिन लगता है। रक्षा करने के स्वभाव के साथ विनम्रता जुड़ जाए तो ये वही बड़े बनते हैं जिनके पास हर मुश्किल में लोग आते हैं।
ज्येष्ठा नक्षत्र के चार पद
पहला पद (धनु नवांश, वृश्चिक 16°40′–20°00′): उदार और सिद्धांतवादी, धर्म, शिक्षण और उच्च शिक्षा की ओर झुकाव।
दूसरा पद (मकर नवांश, वृश्चिक 20°00′–23°20′): महत्वाकांक्षी और मेहनती, प्रशासन और प्रतिष्ठा बनाने में कुशल।
तीसरा पद (कुंभ नवांश, वृश्चिक 23°20′–26°40′): मौलिक सोच वाला और स्वतंत्र, रिसर्च, तकनीक और सामाजिक कार्यों में रुचि।
चौथा पद (मीन नवांश, वृश्चिक 26°40′–30°00′): संवेदनशील, कल्पनाशील और आध्यात्मिक; यह पद मूल नक्षत्र की संधि पर है और गंडमूल शांति में इसी पर सबसे ज़्यादा विचार होता है।
ज्येष्ठा और गंडमूल
ज्येष्ठा छह पारंपरिक गंडमूल नक्षत्रों में से एक है, क्योंकि यह जल राशि (वृश्चिक) और अग्नि राशि (धनु) के मिलन बिंदु पर है। बहुत से परिवार जन्म के लगभग 27वें दिन, जब चंद्रमा फिर ज्येष्ठा में आता है, एक सरल गंडमूल शांति पूजा करवाते हैं। यह आशीर्वाद की एक विधि है, चिंता की बात नहीं। ज्येष्ठा में जन्मे अनगिनत लोग सफल और सुखी जीवन जीते हैं, और परिवार के पुरोहित सहज ढंग से यह शांति करवा देते हैं।
करियर, धन और विवाह
ज्येष्ठा नेतृत्व, मैनेजमेंट, पुलिस और रक्षा सेवा, राजनीति, कानून, जाँच-पड़ताल, पत्रकारिता, सर्जरी और इंजीनियरिंग के लिए अनुकूल है। बुध के प्रभाव से अकाउंट्स, विश्लेषण और संचार में भी योग्यता आती है। थोड़ा संघर्ष देखने के बाद ये पैसे को ज़िम्मेदारी से सँभालते हैं और परिवार के लिए सुरक्षा बनाना पसंद करते हैं।
विवाह में ज्येष्ठा जातक ख्याल रखने वाले और रक्षा करने वाले साथी होते हैं जो सम्मान को महत्व देते हैं। इन्हें ऐसा साथी सबसे अच्छा लगता है जो इनकी ताकत की कद्र करे और इन्हें नरम भी कर सके। कुंडली मिलान में ज्येष्ठा राक्षस गण और वात नाड़ी का है; इसकी योनि हिरण (नर) है और शत्रु योनि कुत्ता (आर्द्रा और मूल)। ये सब पूरी कुंडली के साथ देखे जाते हैं।
ज्येष्ठा नक्षत्र के उपाय
इंद्र देव की पूजा के लिए “ॐ इन्द्राय नमः” का जाप करें। बहुत से ज्येष्ठा जातकों को हनुमान जी या माँ दुर्गा की उपासना से भी शांति मिलती है। नक्षत्र स्वामी बुध के लिए बुधवार को गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएँ और “ॐ बुं बुधाय नमः” का जाप करें।
बड़े भाई-बहनों और घर के बुज़ुर्गों का सम्मान और सेवा इस नक्षत्र के शुभ पक्ष को मज़बूत करती है। पन्ना बुध का रत्न है, लेकिन कोई भी रत्न पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।
आपकी राशि और नक्षत्र क्या है?
एक मिनट में अपनी जन्म कुंडली मुफ़्त बनाइए। आपको अपनी चंद्र राशि, नक्षत्र, लग्न और चल रही दशा दिखेगी।
मेरी मुफ़्त कुंडली बनाइएलोग अक्सर पूछते हैं
ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी बुध है और इसके देवता इंद्र हैं। ज्येष्ठा में जन्मे जातक का जीवन बुध महादशा से शुरू होता है।
क्या ज्येष्ठा गंडमूल नक्षत्र है?
हाँ, ज्येष्ठा परंपरा से गंडमूल नक्षत्रों में गिना जाता है। परिवार आम तौर पर जन्म के 27वें दिन के आसपास आशीर्वाद के रूप में सरल गंडमूल शांति पूजा करवाते हैं।
ज्येष्ठा नक्षत्र किस राशि में आता है?
ज्येष्ठा पूरी तरह वृश्चिक राशि में 16°40′ से 30°00′ तक है।
ज्येष्ठा नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
ज्येष्ठा के चारों पदों के अक्षर नो, या, यी और यू हैं, जैसे नूपुर, यश, यितेश या युवराज।
ज्येष्ठा नक्षत्र का गण क्या है?
ज्येष्ठा राक्षस गण का नक्षत्र है, जो ज्योतिष में प्रबल इच्छाशक्ति और स्वतंत्रता का सूचक है और मुख्य रूप से विवाह मिलान में देखा जाता है।