शतभिषा नक्षत्र
शतभिषा चौबीसवाँ नक्षत्र है, जो कुंभ राशि में 6°40′ से 20°00′ तक है। इसका अर्थ है ‘सौ वैद्य’, और जन्म नक्षत्र के रूप में यह एकांतप्रिय, विचारशील व्यक्ति देता है जिसमें खोज, उपचार और दूसरों से छूट गई बातों को देखने की प्रतिभा होती है।
एक नज़र में
- राशि
- कुंभ
- विस्तार
- 6°40′ कुंभ – 20° कुंभ
- स्वामी ग्रह (दशा)
- राहु
- देवता
- वरुण
- प्रतीक
- वृत
- गण
- राक्षस गण
- नाड़ी
- वात
- योनि
- घोड़ा
- लिंग
- स्त्री
- शुभ दिशा
- दक्षिण
- रंग
- समुद्री हरा
- रत्न
- गोमेधक (गोमेद)
चार पद
- पद 16°40′–10° कुंभनवांश धनुनाम का अक्षर: गो
- पद 210°–13°20′ कुंभनवांश मकरनाम का अक्षर: सा
- पद 313°20′–16°40′ कुंभनवांश कुंभनाम का अक्षर: सी
- पद 416°40′–20° कुंभनवांश मीननाम का अक्षर: सू
शतभिषा का अर्थ, देवता और प्रतीक
शतभिषा का अर्थ है ‘जिसके सौ वैद्य हों’, और इसे शततारका यानी ‘सौ तारे’ भी कहा जाता है। इसके देवता वरुण हैं, ब्रह्मांडीय जल के स्वामी और ऋत यानी सृष्टि के नैतिक नियम के रक्षक। ऋग्वेद में वरुण सब कुछ देखते हैं और औषधियों के स्वामी हैं; सच्चे मन से क्षमा माँगने वाले को वे दोषों से मुक्त भी करते हैं।
इसका प्रतीक खाली वृत्त या सौ तारों का समूह है। वृत्त अपने आप में पूर्ण है और भीतर एक सुरक्षित घेरा बनाता है। यही शतभिषा का स्वभाव है: आत्मनिर्भर, अपने भीतरी संसार की रक्षा करने वाला और शांत एकाग्रता में सबसे अच्छा काम करने वाला।
स्वभाव और व्यक्तित्व
शतभिषा के जातक बुद्धिमान, स्वतंत्र और सत्यवादी होते हैं, और अक्सर इनकी सोच औरों से अलग होती है। नक्षत्र स्वामी राहु मौलिकता और तकनीक, विज्ञान व अनजानी चीज़ों में रुचि देता है, जबकि कुंभ के स्वामी शनि गंभीरता और मानवसेवा की भावना जोड़ते हैं।
ये अपनी निजता को महत्व देते हैं और भरोसा होने तक संकोची दिख सकते हैं। राक्षस गण होने से ये दृढ़ इच्छाशक्ति वाले होते हैं और भीड़ के पीछे नहीं चलते। इनकी ईमानदारी कभी रूखी लग सकती है, पर उसके पीछे चीज़ों को ठीक करने की सच्ची इच्छा होती है। अकेले में ऊर्जा जुटाने का समय मिले तो ये समझदार और भरोसेमंद मार्गदर्शक बनते हैं।
शतभिषा नक्षत्र के चार पद
पहला पद (धनु नवांश, कुंभ 6°40′–10°00′): आशावादी और दार्शनिक, उच्च शिक्षा और न्यायपूर्ण व्यवहार में रुचि।
दूसरा पद (मकर नवांश, कुंभ 10°00′–13°20′): व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी, काम में अनुशासित और संगठित।
तीसरा पद (कुंभ नवांश, कुंभ 13°20′–16°40′): वर्गोत्तम पद, बहुत मौलिक, वैज्ञानिक सोच वाला और मानवतावादी।
चौथा पद (मीन नवांश, कुंभ 16°40′–20°00′): करुणामय और अंतर्ज्ञानी, उपचार और आध्यात्मिक जीवन की ओर झुकाव।
करियर और धन
अपने नाम के अनुसार शतभिषा चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, आयुर्वेद और वैकल्पिक उपचार के लिए अनुकूल है। राहु और शनि मिलकर टेक्नोलॉजी, सॉफ़्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एविएशन, अंतरिक्ष विज्ञान, ज्योतिष और हर तरह की रिसर्च में भी साथ देते हैं। वरुण का नक्षत्र होने से शिपिंग या केमिकल जैसे जल से जुड़े काम भी ठीक रहते हैं।
अपना विशेष क्षेत्र मिल जाए तो ये जातक अच्छी कमाई करते हैं। नियमित बचत और अचानक आई स्कीमों से सावधानी इनके हुनर को स्थायी सुरक्षा में बदल देती है।
प्रेम और विवाह
प्रेम में शतभिषा जातक सच्चे और वफ़ादार होते हैं, पर खुलने में समय लेते हैं। इन्हें ऐसा साथी चाहिए जो मानसिक स्पेस दे और अच्छी बातचीत का आनंद ले। एक बार रिश्ता बन जाए तो ये ईमानदार और रक्षा करने वाले साथी साबित होते हैं, और बदले में भी ईमानदारी की कद्र करते हैं।
कुंडली मिलान में शतभिषा राक्षस गण और वात नाड़ी का है। इसकी योनि घोड़ा (मादा) है और शत्रु योनि भैंसा (हस्त और स्वाति)। अनुभवी ज्योतिषी सभी कूटों को ग्रहों के साथ देखकर ही सलाह देते हैं।
शतभिषा नक्षत्र के उपाय
वरुण देव का सम्मान “ॐ वरुणाय नमः” के जाप, सूर्य को जल देने और कुएँ, तालाब या नदियों को साफ़ रखने से होता है। भगवान शिव की उपासना, खासकर जल से अभिषेक, भी इस नक्षत्र के लिए पारंपरिक है।
राहु के लिए शनिवार को “ॐ रां राहवे नमः” का जाप करें और बीमारों या गरीबों की मदद करें, जो वैद्यों के इस नक्षत्र के लिए बहुत उचित है। गोमेद राहु का रत्न है, लेकिन इसे पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।
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शतभिषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है और इसके देवता वरुण हैं। शतभिषा में जन्मे जातक का जीवन राहु महादशा से शुरू होता है।
शतभिषा नक्षत्र किस राशि में आता है?
शतभिषा पूरी तरह कुंभ राशि में 6°40′ से 20°00′ तक है।
शतभिषा नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
शतभिषा के चारों पदों के अक्षर गो, सा, सी और सू हैं, जैसे गोपाल, साक्षी, सिद्धार्थ या सुमन।
शतभिषा का अर्थ क्या है?
शतभिषा का अर्थ है ‘सौ वैद्य’ या ‘सौ चिकित्सक’, और इसे शततारका यानी ‘सौ तारे’ भी कहा जाता है।
शतभिषा नक्षत्र का गण क्या है?
शतभिषा राक्षस गण का नक्षत्र है, जो ज्योतिष में स्वतंत्रता और प्रबल इच्छाशक्ति का संकेत है।