कृत्तिका नक्षत्र
कृत्तिका तीसरा नक्षत्र है, जो मेष राशि के 26°40′ से वृषभ राशि के 10° तक फैला है। जन्म के समय चंद्रमा यहाँ हो तो कृत्तिका आपका जन्म नक्षत्र है। इसका सार है शुद्ध करने वाली अग्नि: साफ़ सोच, ऊँचे आदर्श और रक्षा करने वाली गर्माहट।
एक नज़र में
- विस्तार
- 26°40′ मेष – 10° वृषभ
- स्वामी ग्रह (दशा)
- सूर्य
- देवता
- अग्नि
- प्रतीक
- छुरा
- गण
- राक्षस गण
- नाड़ी
- कफ
- योनि
- भेड़
- लिंग
- स्त्री
- शुभ दिशा
- उत्तर
- रंग
- सफेद
- रत्न
- माणिक्य रत्न
चार पद
- पद 126°40′–30° मेषनवांश धनुनाम का अक्षर: आ
- पद 20°–3°20′ वृषभनवांश मकरनाम का अक्षर: ई
- पद 33°20′–6°40′ वृषभनवांश कुंभनाम का अक्षर: उ
- पद 46°40′–10° वृषभनवांश मीननाम का अक्षर: ए
कृत्तिका का अर्थ
कृत्तिका का अर्थ है ‘काटने वाली’। आकाश में यह छोटे-छोटे चमकते तारों का समूह है, जिसे अंग्रेज़ी में प्लीएडीज़ कहते हैं। सबसे प्राचीन वैदिक सूचियों में कृत्तिका को ही पहला नक्षत्र माना गया था, जो इसके महत्व को दिखाता है।
इसका स्वामी सूर्य है, जो आत्मा और अधिकार का कारक है। कृत्तिका दो राशियों में बँटा है: पहला पद अग्नि राशि मेष में और बाकी तीन पद पृथ्वी राशि वृषभ में, जहाँ चंद्रमा उच्च का होता है।
अग्नि देव और छुरे का प्रतीक
कृत्तिका के देवता अग्नि हैं, जो यज्ञ की हर आहुति देवताओं तक पहुँचाते हैं। अग्नि सोने को शुद्ध करती है, भोजन पकाती है और घर को रोशन करती है। इसका प्रतीक छुरा या लौ भी यही बताता है: एक तेज़ धार जो काम की चीज़ को बेकार से अलग कर देती है।
पुराणों के अनुसार छह कृत्तिकाओं ने बालक कार्तिकेय का पालन किया था, इसलिए वे कार्तिकेय कहलाए। इस तरह यह नक्षत्र योद्धा के साहस और माँ की ममता, दोनों को साथ रखता है।
स्वभाव और व्यक्तित्व
कृत्तिका के जातक स्पष्टवादी, सिद्धांतवादी और मेहनती होते हैं। सच कड़वा हो तब भी कह देते हैं, आलस्य और बेईमानी उन्हें पसंद नहीं, और सबसे कड़े नियम वे खुद पर लागू करते हैं। राक्षस गण होने से इनमें आत्मनिर्भरता और अकेले खड़े रहने का साहस होता है; राक्षस गण का अर्थ बस प्रबल इच्छाशक्ति है।
थकान में यही आग आलोचना या गुस्से के रूप में निकल सकती है। सच्चाई बनाए रखते हुए शब्दों को थोड़ा कोमल करें, तो ये बेहतरीन शिक्षक, मार्गदर्शक और रक्षक बनते हैं।
कृत्तिका नक्षत्र के चार पद
पहला पद (धनु नवांश, मेष राशि): आदर्शवादी और साहसी, धर्म, शिक्षा और नेतृत्व की ओर झुकाव।
दूसरा पद (मकर नवांश, वृषभ राशि): अनुशासित और महत्वाकांक्षी, धन और पद के मामले में व्यावहारिक।
तीसरा पद (कुंभ नवांश, वृषभ राशि): मानवतावादी और नए विचारों वाले, विज्ञान और समाज सेवा में रुचि।
चौथा पद (मीन नवांश, वृषभ राशि): कोमल, भक्तिभाव वाले और कल्पनाशील; यहाँ अग्नि श्रद्धा और करुणा में बदल जाती है।
करियर और धन
कृत्तिका अधिकार और सटीकता वाले कामों में सफल होता है: सरकारी सेवा, प्रशासन, रक्षा, सर्जरी, इंजीनियरिंग, धातु उद्योग, और अग्नि से जुड़े काम जैसे रसोई, बेकरी और होटल। तेज़ बुद्धि के कारण संपादन, ऑडिट और गुणवत्ता जाँच में भी ये अच्छे रहते हैं।
ये ईमानदार कमाई पसंद करते हैं। विशेषकर वृषभ राशि वाले पद धीरे-धीरे ठोस संपत्ति बनाते हैं।
विवाह और उपाय
कृत्तिका के जातक जीवनसाथी के प्रति सच्चे और रक्षक होते हैं, हालाँकि प्रेम को वे रोमांस से ज़्यादा कर्तव्य से दिखाते हैं। इनकी मेढ़ा (भेड़) योनि है, जिसका मेल दूसरी मेढ़ा योनि से अच्छा और वानर योनि से विरोधी माना जाता है। अंत्य (कफ) नाड़ी होने से अलग नाड़ी का साथी बेहतर है, और राक्षस गण के कारण पारंपरिक मिलान में राक्षस गण साथी या पूरी कुंडली की सावधानी से जाँच की जाती है।
उपाय के लिए रोज़ उगते सूर्य को जल दें, रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ें, और घी का दीपक जलाकर ‘ॐ अग्नये नमः’ का जाप करें। माणिक्य सूर्य का रत्न है, पर कोई भी रत्न पहनने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।
आपकी राशि और नक्षत्र क्या है?
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कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी कौन है?
कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है और देवता अग्नि हैं। इसमें जन्म लेने वालों की पहली महादशा सूर्य की होती है।
कृत्तिका नक्षत्र किस राशि में आता है?
कृत्तिका का पहला पद मेष राशि में और दूसरा, तीसरा व चौथा पद वृषभ राशि में आता है। चंद्र राशि पद के अनुसार तय होती है।
कृत्तिका नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
कृत्तिका के अक्षर आ, ई, उ और ए हैं, पहले से चौथे पद तक। जैसे आदित्य, ईशान, उमा या एकता।
कृत्तिका नक्षत्र का गण क्या है?
कृत्तिका राक्षस गण का नक्षत्र है। इसका सरल अर्थ है प्रबल इच्छाशक्ति और स्वतंत्र स्वभाव, इसमें कुछ भी नकारात्मक नहीं।