स्वाति नक्षत्र
स्वाति 27 नक्षत्रों में पंद्रहवाँ नक्षत्र है, जो पूरी तरह तुला राशि में 6°40′ से 20°00′ तक फैला है। जन्म के समय चंद्रमा यहाँ हो तो स्वाति आपका जन्म नक्षत्र है। इसका मूल भाव है स्वतंत्रता, हवा में झूमती कोमल कोंपल की तरह, जो झुकती तो है पर अपनी जड़ नहीं छोड़ती।
एक नज़र में
- राशि
- तुला
- विस्तार
- 6°40′ तुला – 20° तुला
- स्वामी ग्रह (दशा)
- राहु
- देवता
- वायु
- प्रतीक
- मूंगा
- गण
- देव गण
- नाड़ी
- कफ
- योनि
- भैंस
- लिंग
- पुरुष
- शुभ दिशा
- उत्तर
- रंग
- काला
- रत्न
- गोमेधक (गोमेद)
चार पद
- पद 16°40′–10° तुलानवांश धनुनाम का अक्षर: रू
- पद 210°–13°20′ तुलानवांश मकरनाम का अक्षर: रे
- पद 313°20′–16°40′ तुलानवांश कुंभनाम का अक्षर: रो
- पद 416°40′–20° तुलानवांश मीननाम का अक्षर: ता
स्वाति का अर्थ, देवता और प्रतीक
स्वाति शब्द का अर्थ प्रायः ‘स्वयं चलने वाला’ या ‘स्वतंत्र’ माना जाता है। इसके देवता वायु हैं, वही प्राण जो हर जीव के भीतर चलता है। पुराणों में वायु देव हनुमान जी और भीम के पिता हैं, और दोनों की शक्ति में एक खास फुर्ती और लचीलापन है। स्वाति का स्वभाव भी यही है: ज़ोर से नहीं, लचीलेपन से जीतना।
इसका प्रतीक मूंगा माना गया है, और कई ग्रंथ हवा में लहराते नए अंकुर का भी उल्लेख करते हैं। दोनों ही धीरे-धीरे बढ़ने और समय के साथ सुंदर बनने की बात कहते हैं। लोक मान्यता है कि स्वाति नक्षत्र में गिरी बूँद सीप में जाकर मोती बन जाती है, इसीलिए स्वाति को सही समय पर मिलने वाले दुर्लभ फल से जोड़ा जाता है।
स्वभाव और व्यक्तित्व
स्वाति नक्षत्र के जातक आम तौर पर विनम्र, मिलनसार और अपनी आज़ादी को महत्व देने वाले होते हैं। उन्हें कोई हुक्म दे, यह पसंद नहीं आता; भरोसा मिले तो वे अपना रास्ता खुद बना लेते हैं। नक्षत्र स्वामी राहु जिज्ञासा, विदेशी विचारों में रुचि और व्यापार की समझ देता है, जबकि तुला के स्वामी शुक्र आकर्षण, न्यायप्रियता और संतुलन की नज़र देते हैं।
वायु चंचल है, इसलिए मन कई विकल्पों के बीच झूल सकता है और निर्णय में समय लग सकता है। पर इसी में इनकी कूटनीति छिपी है: ये झगड़े के दोनों पक्ष देख लेते हैं और रिश्ते आसानी से नहीं तोड़ते। देव गण होने से स्वभाव में सौम्यता और भलाई की भावना रहती है।
स्वाति नक्षत्र के चार पद
पहला पद (धनु नवांश, तुला 6°40′–10°00′): आशावादी और सिद्धांतवादी, पढ़ाई, यात्रा और शिक्षण की ओर झुकाव।
दूसरा पद (मकर नवांश, तुला 10°00′–13°20′): व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी, व्यापार और दीर्घकालीन योजना में सबसे कुशल।
तीसरा पद (कुंभ नवांश, तुला 13°20′–16°40′): नए विचारों वाला, तकनीक, नेटवर्क और समाज से जुड़े कामों में रुचि।
चौथा पद (मीन नवांश, तुला 16°40′–20°00′): कोमल हृदय, कल्पनाशील और आध्यात्मिक, कला या सेवा से जुड़ाव।
करियर और धन
स्वाति को व्यापारियों का नक्षत्र कहा जाता है। व्यापार, आयात-निर्यात, सेल्स, बातचीत और सौदेबाज़ी, वकालत, कूटनीति, एविएशन, ट्रैवल और वे सभी काम जिनमें चीज़ें या विचार एक जगह से दूसरी जगह पहुँचते हैं, इन्हें खूब जमते हैं। राहु के प्रभाव से टेक्नोलॉजी, मीडिया और विदेशी कंपनियों में भी अच्छे अवसर मिलते हैं।
धन हवा की तरह लहरों में आता है। अच्छे समय में बचत करना और जल्दबाज़ी के जोखिम से बचना इनके लिए सबसे समझदारी का रास्ता है। एक स्थिर ज़रिया मिल जाए तो कमाई चुपचाप बढ़ती रहती है।
प्रेम और विवाह
रिश्तों में स्वाति जातक ऐसा साथी चाहते हैं जो दोस्त भी हो और उनकी आज़ादी का सम्मान करे। वे स्नेही और शिष्ट होते हैं, लेकिन बंधन महसूस हो तो पीछे हट जाते हैं। इनके लिए बड़े वादों से ज़्यादा ज़रूरी है शांत और साफ़ बातचीत।
कुंडली मिलान में स्वाति देव गण है, इसलिए देव गण नक्षत्रों से मेल अच्छा माना जाता है और मनुष्य गण से भी ठीक रहता है। इसकी योनि भैंसा है और शत्रु योनि घोड़ा, इसलिए अश्विनी और शतभिषा से योनि कूट में कुछ अंक कम होते हैं। स्वाति कफ नाड़ी का नक्षत्र है, तो समान नाड़ी वाले साथी के साथ नाड़ी दोष की जाँच ध्यान से की जाती है। ये सब गुण मिलान के हिस्से हैं; अंतिम फैसला पूरी कुंडली देखकर ही होना चाहिए।
स्वाति नक्षत्र के उपाय
स्वाति के लिए सरल और नियमित उपाय सबसे अच्छे हैं। सुबह सूर्य को जल देना, प्राणायाम करना और “ॐ वायवे नमः” का जाप वायु देव को प्रसन्न करता है। हनुमान जी वायु पुत्र हैं, इसलिए मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ भी शुभ माना जाता है।
नक्षत्र स्वामी राहु के लिए शनिवार को “ॐ रां राहवे नमः” का जाप और ज़रूरतमंदों को दान करें। गोमेद राहु का रत्न है, लेकिन कोई भी रत्न पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।
आपकी राशि और नक्षत्र क्या है?
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स्वाति नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी दशा के अनुसार स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु है और इसके देवता वायु हैं। स्वाति में जन्मे जातक का जीवन राहु महादशा से शुरू होता है।
स्वाति नक्षत्र किस राशि में आता है?
स्वाति नक्षत्र पूरी तरह तुला राशि में 6°40′ से 20°00′ तक है, इसलिए इसके चारों पद तुला में ही आते हैं।
स्वाति नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
स्वाति के चारों पदों के अक्षर रू, रे, रो और ता हैं। जैसे रूपेश, रेवा, रोहन या तन्वी।
क्या स्वाति नक्षत्र विवाह के लिए अच्छा है?
हाँ, स्वाति देव गण का सौम्य नक्षत्र है और इसके जातक शिष्ट व वफ़ादार साथी माने जाते हैं। फिर भी रिश्ता तय करने से पहले दोनों कुंडलियों का पूरा मिलान करना चाहिए।
स्वाति नक्षत्र का गण क्या है?
स्वाति नक्षत्र देव गण का है, जो दयालु, भले और सात्विक स्वभाव का सूचक माना जाता है।