पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा बीसवाँ नक्षत्र है, जो धनु राशि में 13°20′ से 26°40′ तक है। इसका अर्थ है ‘पहला अजेय’, और जन्म नक्षत्र के रूप में यह आत्मविश्वास, दृढ़ विश्वास और लोगों का मन जीत लेने की कला देता है।
एक नज़र में
- राशि
- धनु
- विस्तार
- 13°20′ धनु – 26°40′ धनु
- स्वामी ग्रह (दशा)
- शुक्र
- देवता
- वारि
- प्रतीक
- गजदन्त (हाथी का दांत)
- गण
- मनुष्य गण
- नाड़ी
- पित्त
- योनि
- बंदर
- लिंग
- पुरुष
- शुभ दिशा
- पूर्व
- रंग
- काला
- रत्न
- हीरा रत्न
चार पद
- पद 113°20′–16°40′ धनुनवांश सिंहनाम का अक्षर: भू
- पद 216°40′–20° धनुनवांश कन्यानाम का अक्षर: धा
- पद 320°–23°20′ धनुनवांश तुलानाम का अक्षर: फा
- पद 423°20′–26°40′ धनुनवांश वृश्चिकनाम का अक्षर: ढा
पूर्वाषाढ़ा का अर्थ, देवता और प्रतीक
आषाढ़ा का अर्थ है ‘जिसे जीता न जा सके’, और पूर्व का अर्थ है ‘पहला’; यह उत्तराषाढ़ा के साथ जोड़ी बनाता है। इसके देवता अपः यानी दिव्य जल हैं। वेदों में जल शुद्ध करता है, रोग दूर करता है, जीवन देता है, और हर बाधा के आसपास से अपना रास्ता निकाल लेता है। इसी से पूर्वाषाढ़ा में शुद्धि और नवीनता का गुण आता है, और बहती हुई, मनाने वाली शक्ति भी।
इसका प्रतीक हाथी दाँत है, और कुछ ग्रंथ सूप (अनाज फटकने वाला पंखा) भी बताते हैं। हाथी दाँत शक्ति और गौरव का चिह्न है, ऐसी ताकत जिसे हटाया न जा सके। सूप अनाज को भूसे से अलग करता है, जो इस नक्षत्र की सच और शोर को अलग करने की क्षमता बताता है।
स्वभाव और व्यक्तित्व
पूर्वाषाढ़ा के जातक आशावादी, स्वाभिमानी और उत्साह से भरे होते हैं। नक्षत्र स्वामी शुक्र आकर्षण, कलात्मक रुचि और सुख-सुविधा से प्रेम देता है, जबकि धनु के स्वामी गुरु आदर्शवाद और दार्शनिक दृष्टि जोड़ते हैं। ये अच्छी बहस करते हैं और जिस बात पर विश्वास हो, उसके लिए दूसरों को बड़ी आसानी से मना लेते हैं।
इनका आत्मविश्वास बड़ी पूँजी है, हालाँकि कभी-कभी यह ज़िद या दूसरों की बात न मानने में बदल सकता है। मनुष्य गण होने से ये व्यावहारिक और मिलनसार होते हैं और आदर्श व रोज़मर्रा की ज़रूरतों में संतुलन रखते हैं। अपनी बात मनवाने की कला को अच्छे कामों में लगाएँ तो लोग दिल से इनके साथ जुड़ते हैं।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चार पद
पहला पद (सिंह नवांश, धनु 13°20′–16°40′): स्वाभिमानी, साहसी और उदार, स्वाभाविक नेतृत्व।
दूसरा पद (कन्या नवांश, धनु 16°40′–20°00′): बारीकी देखने वाला और व्यावहारिक, योजना और सेवा कार्य में अच्छा।
तीसरा पद (तुला नवांश, धनु 20°00′–23°20′): आकर्षक और कलात्मक, शुक्र का सबसे ज़्यादा प्रभाव, रिश्तों और डिज़ाइन में कुशल।
चौथा पद (वृश्चिक नवांश, धनु 23°20′–26°40′): तीव्र और खोजी, गूढ़ विषयों और परिवर्तन की ओर झुकाव।
करियर और धन
पूर्वाषाढ़ा उन करियर के लिए अच्छा है जिनमें प्रभाव और मनाने की कला चाहिए: वकालत, राजनीति, सार्वजनिक भाषण, मार्केटिंग, मीडिया, अध्यापन और वाद-विवाद। शुक्र और जल देवता मिलकर कला, फैशन, सौंदर्य, होटल-हॉस्पिटैलिटी, शिपिंग, जल से जुड़े उद्योग और यात्रा को अनुकूल बनाते हैं। किसी ब्रांड या उद्देश्य का चेहरा बनने वाली भूमिकाओं में ये खूब सफल होते हैं।
इन्हें अच्छा रहन-सहन पसंद है, इसलिए पैसों के प्रबंधन में सावधानी ज़रूरी है। नियमित बचत और विलासिता पर थोड़ा संयम रखें तो समय के साथ अच्छी संपत्ति बनती है।
प्रेम और विवाह
प्रेम में पूर्वाषाढ़ा जातक गर्मजोशी भरे, भाव व्यक्त करने वाले और वफ़ादार होते हैं, और रोमांस व सुंदरता का आनंद लेते हैं। इन्हें ऐसा साथी अच्छा लगता है जो इनकी कद्र करे और जीवन के प्रति इनके उत्साह में साथ दे। छोटे-मोटे अहं के टकराव हो सकते हैं, पर सम्मान मिलते ही ये जल्दी माफ़ कर देते हैं।
कुंडली मिलान में पूर्वाषाढ़ा मनुष्य गण और पित्त नाड़ी का है। इसकी योनि बंदर (नर) है और शत्रु योनि भेड़ (कृत्तिका और पुष्य)। मनुष्य और देव गण नक्षत्रों से मेल आम तौर पर सहज रहता है, पर अंतिम निर्णय पूरा गुण मिलान और ग्रह स्थिति देखकर ही होता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के उपाय
जल देवता का सम्मान करने के लिए सूर्य को जल दें, जल स्रोतों को साफ़ रखें और जब संभव हो, किसी नदी या पवित्र सरोवर पर जाएँ। “ॐ अद्भ्यो नमः” मंत्र जल देवता को समर्पित है। शुक्रवार को माँ लक्ष्मी की पूजा भी पारंपरिक है।
शुक्र के लिए शुक्रवार को “ॐ शुं शुक्राय नमः” का जाप करें और चावल, दही या सफ़ेद वस्त्र जैसी सफ़ेद चीज़ों का दान करें। हीरा शुक्र का रत्न है, लेकिन कोई भी रत्न पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।
आपकी राशि और नक्षत्र क्या है?
एक मिनट में अपनी जन्म कुंडली मुफ़्त बनाइए। आपको अपनी चंद्र राशि, नक्षत्र, लग्न और चल रही दशा दिखेगी।
मेरी मुफ़्त कुंडली बनाइएलोग अक्सर पूछते हैं
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है और इसके देवता अपः (दिव्य जल) हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक का जीवन शुक्र महादशा से शुरू होता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में आता है?
पूर्वाषाढ़ा पूरी तरह धनु राशि में 13°20′ से 26°40′ तक है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
पूर्वाषाढ़ा के चारों पदों के अक्षर भू, धा, फा और ढा हैं, जैसे भूमि, धवल या फाल्गुनी।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का गण क्या है?
पूर्वाषाढ़ा मनुष्य गण का नक्षत्र है, जो व्यावहारिक, मिलनसार और संतुलित स्वभाव का संकेत है।