अश्विनी नक्षत्र
अश्विनी 27 नक्षत्रों में पहला नक्षत्र है, जो मेष राशि में 0° से 13°20′ तक फैला है। जन्म के समय चंद्रमा इस नक्षत्र में हो तो अश्विनी आपका जन्म नक्षत्र होता है। इसका मूल स्वभाव है तेज़ी, नई शुरुआत और दूसरों की मदद के लिए सबसे पहले आगे आना।
एक नज़र में
- राशि
- मेष
- विस्तार
- 0° मेष – 13°20′ मेष
- स्वामी ग्रह (दशा)
- केतु
- देवता
- अश्विनी कुमार
- प्रतीक
- अश्वमुख
- गण
- देव गण
- नाड़ी
- वात
- योनि
- घोड़ा
- लिंग
- पुरुष
- शुभ दिशा
- दक्षिण
- रंग
- रक्त लाल
- रत्न
- वैडूर्य (लहसुनिया)
चार पद
- पद 10°–3°20′ मेषनवांश मेषनाम का अक्षर: चु
- पद 23°20′–6°40′ मेषनवांश वृषभनाम का अक्षर: चे
- पद 36°40′–10° मेषनवांश मिथुननाम का अक्षर: चो
- पद 410°–13°20′ मेषनवांश कर्कनाम का अक्षर: ला
अश्विनी नक्षत्र का अर्थ
अश्विनी शब्द ‘अश्व’ यानी घोड़े से बना है। राशिचक्र का पहला नक्षत्र होने के कारण इसमें हर शुरुआत की ऊर्जा है: पहला कदम, पहली कोशिश, और मुश्किल घड़ी में सबसे पहले पहुँचने वाली मदद।
इस नक्षत्र का स्वामी केतु है और यह पूरा मंगल की अग्नि राशि मेष में आता है। केतु अंतर्ज्ञान और वैराग्य देता है, मंगल साहस और जोश। इसलिए अश्विनी के जातक जल्दी निर्णय लेते हैं और कई बार बिना समझाए ही सही उत्तर तक पहुँच जाते हैं।
अश्विनी कुमार और अश्वमुख प्रतीक
इस नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार हैं, जो देवताओं के वैद्य माने जाते हैं। ये जुड़वाँ भाई सूर्य देव और संज्ञा के पुत्र हैं, जिनका जन्म तब हुआ जब संज्ञा ने घोड़ी का रूप धारण किया था। ऋग्वेद में ये भोर के समय तेज़ रथ पर आकर संकट में फँसे लोगों को बचाते हैं और च्यवन ऋषि को फिर से यौवन देते हैं।
इसलिए घोड़े के सिर का प्रतीक केवल गति नहीं, बल्कि समय पर पहुँचने वाली सहायता का भी संकेत है। अश्विनी नक्षत्र वाले अक्सर घर और कार्यस्थल पर सबसे पहले समस्या सुलझाने वाले होते हैं।
स्वभाव और व्यक्तित्व
अश्विनी के जातक ऊर्जावान, सीधे-सादे और हर उम्र में मन से युवा रहते हैं। उन्हें इंतज़ार करना और घुमा-फिराकर बात करना पसंद नहीं। देव गण होने से इनका स्वभाव उदार और खुले दिल का होता है, और कई लोगों में सेवा व उपचार की स्वाभाविक प्रतिभा होती है।
तेज़ी का दूसरा पहलू अधीरता है। ये कई काम शुरू करके बीच में छोड़ सकते हैं या सबकी बात सुने बिना फ़ैसला ले सकते हैं। शुरू किए काम को पूरा करना और अपनों के लिए थोड़ा धीमा होना सीखें, तो यह नक्षत्र अपना सबसे अच्छा रूप दिखाता है।
अश्विनी नक्षत्र के चार पद
पहला पद (मेष नवांश): सबसे शुद्ध अश्विनी, साहसी और अग्रणी। नेतृत्व और खेल के लिए अच्छा।
दूसरा पद (वृषभ नवांश): अधिक स्थिर और व्यावहारिक, धन, सुख-सुविधा और अच्छी रुचि की ओर झुकाव।
तीसरा पद (मिथुन नवांश): जिज्ञासु, बातूनी और हाथ व बुद्धि दोनों से कुशल। व्यापार और संचार में सफल।
चौथा पद (कर्क नवांश): सबसे संवेदनशील पद। यहाँ अश्विनी कुमारों का उपचार वाला गुण और परिवार व माँ से लगाव सबसे गहरा होता है।
करियर और धन
जहाँ तेज़ी और हिम्मत की ज़रूरत हो, वहाँ अश्विनी चमकता है। चिकित्सा, नर्सिंग, आयुर्वेद, फ़िज़ियोथेरेपी, आपातकालीन सेवाएँ, सेना और पुलिस, खेल, वाहन, परिवहन और यात्रा इसके पारंपरिक क्षेत्र हैं। नए प्रोजेक्ट और स्टार्ट-अप भी इन्हें खूब भाते हैं।
ये धन मेहनत और पहल से कमाते हैं। थोड़ी योजना और हिसाब-किताब रखने वाला भरोसेमंद साथी धन को टिकाए रखने में मदद करता है।
विवाह, गंडमूल शांति और उपाय
प्रेम में अश्विनी ईमानदार और गर्मजोशी भरे होते हैं, बस उन्हें थोड़ी आज़ादी चाहिए। कुंडली मिलान में इनकी अश्व (घोड़ा) योनि है, जिसका मेल दूसरी अश्व योनि से सबसे अच्छा माना जाता है, और भैंस (महिष) योनि को विरोधी माना जाता है। इनकी आदि (वात) नाड़ी है, इसलिए अलग नाड़ी वाला साथी बेहतर माना जाता है। फिर भी असली फ़ैसला पूरे अष्टकूट मिलान से ही होता है।
अश्विनी छह गंडमूल नक्षत्रों में से एक है। परंपरा से जन्म के 27वें दिन, जब चंद्रमा फिर अश्विनी में आता है, गंडमूल शांति पूजा कराई जाती है; यह आशीर्वाद की एक सामान्य विधि है, चिंता की बात नहीं। रोज़ ‘ॐ अश्विनीकुमाराभ्यां नमः’ का जाप करें, केतु के लिए गणेश जी की पूजा करें और बीमारों व बुज़ुर्गों की सेवा करें। लहसुनिया केतु का रत्न है, पर कोई भी रत्न पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।
आपकी राशि और नक्षत्र क्या है?
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मेरी मुफ़्त कुंडली बनाइएलोग अक्सर पूछते हैं
अश्विनी नक्षत्र का स्वामी कौन है?
अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु है और इसके देवता अश्विनी कुमार हैं। इस नक्षत्र में जन्म होने पर जीवन की शुरुआत केतु की महादशा से होती है।
अश्विनी नक्षत्र किस राशि में आता है?
अश्विनी नक्षत्र के चारों पद मेष राशि में 0° से 13°20′ तक आते हैं, इसलिए इसके जातकों की चंद्र राशि मेष होती है।
अश्विनी नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
अश्विनी नक्षत्र के अक्षर चु, चे, चो और ला हैं, क्रमशः पहले से चौथे पद के लिए। जैसे चेतन, लता या लक्ष्मी।
क्या अश्विनी गंडमूल नक्षत्र है?
हाँ, अश्विनी गंडमूल नक्षत्रों में गिना जाता है। जन्म के बाद एक छोटी गंडमूल शांति पूजा कराने की परंपरा है, इसे डर की बात न समझें।
क्या अश्विनी नक्षत्र विवाह के लिए अच्छा है?
अश्विनी के जातक वफ़ादार और स्नेही जीवनसाथी होते हैं। विवाह का मेल गण, योनि और नाड़ी सहित पूरे कुंडली मिलान से तय होता है।