वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशिचक्र की आठवीं राशि है। इस पेज पर वृश्चिक का अर्थ आपकी चंद्र राशि से है, यानी जन्म के समय चंद्रमा की राशि। पश्चिमी “Scorpio” सूर्य राशि सूर्य की स्थिति और अलग राशिचक्र से निकलती है, इसलिए वह आपकी वैदिक राशि से अलग हो सकती है।
एक नज़र में
- स्वामी ग्रह
- मंगल
- तत्व
- जल
- स्वभाव
- स्थिर
- विस्तार
- 210°–240°
वृश्चिक राशि वालों का स्वभाव
वृश्चिक राशि वाले हर बात को गहराई से महसूस करते हैं। ये कोई काम आधे मन से नहीं करते। वफ़ादारी पूरी, जिज्ञासा जड़ तक और भावनाएँ तेज़, भले ही बाहर से दिखें नहीं। ये अपने मन की दुनिया सिर्फ़ उन्हीं को दिखाते हैं जिन पर पूरा भरोसा हो।
राशि स्वामी मंगल हैं और यह जल तत्व की स्थिर राशि है। इस राशि में चंद्रमा को नीच का माना जाता है। इसका मतलब दुर्भाग्य नहीं है। इसका अर्थ है कि मन संवेदनशील है और भीतर भावनात्मक उथल-पुथल से गुज़रता है, और यही अनुभव इन्हें असाधारण सहनशक्ति और गहरी समझ देता है।
खूबियाँ और कमज़ोरियाँ
वृश्चिक राशि के लोग दृढ़ निश्चयी, पारखी और संकट में निडर होते हैं। ये दिखावे को तुरंत पहचान लेते हैं, राज़ सँभालकर रखते हैं और मुश्किल दौर के बाद ज़िंदगी को फिर से खड़ा करने की ताक़त रखते हैं। रिसर्च, इलाज और साधना जैसे गहरे विषय इन्हें आकर्षित करते हैं।
शक, अधिकार जताने की आदत और पुराने दर्द को पकड़े रहना इनकी चुनौतियाँ हैं। ये किसी पर भरोसा करने से पहले उसे परखते हैं और दुख को भीतर ही दबाए रखते हैं। किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति से खुलकर बात करना और अपने लिए माफ़ करना सीखना इन्हें बहुत हल्का करता है।
करियर और धन
जिस काम में गहराई, गोपनीयता या हिम्मत चाहिए, वहाँ वृश्चिक राशि वाले सफल होते हैं। रिसर्च, जाँच-पड़ताल, सर्जरी, चिकित्सा, मनोविज्ञान, बीमा, टैक्स, खनन, रक्षा क्षेत्र और ज्योतिष जैसे गूढ़ विषय इनके पारंपरिक क्षेत्र हैं।
पैसे के मामले में ये सोच-समझकर और चुपचाप चलते हैं। साझा संपत्ति, विरासत या साझेदारी से भी लाभ के योग बनते हैं। बस भावनाओं में आकर सट्टे या जोखिम भरे निवेश से बचें। कुंडली का आठवाँ और ग्यारहवाँ भाव और चल रही दशा ज़्यादा जानकारी देते हैं।
प्रेम और विवाह
विवाह में वृश्चिक राशि वाले पूरी तरह समर्पित और अपने साथी के रक्षक होते हैं। एक बार रिश्ता जुड़ गया तो ये पूरा दिल दे देते हैं और बदले में पूरी ईमानदारी चाहते हैं। धीरे-धीरे बना भरोसा ही इनके लिए सब कुछ है।
परंपरागत रूप से वृश्चिक का मेल कर्क और मीन (जल तत्व) के साथ अच्छा माना जाता है, और कन्या व मकर स्थिरता देती हैं। विवाह से पहले कुंडली मिलान के साथ मांगलिक दोष की जाँच भी ज़रूर करवाएँ।
स्वास्थ्य
ज्योतिष में वृश्चिक राशि का संबंध गुप्तांगों और उत्सर्जन तंत्र से माना जाता है, साथ ही मन में दबे तनाव का असर भी शरीर पर पड़ता है। इसलिए इन्हें भावनाएँ दबाकर न रखने, साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखने और नियमित जाँच करवाने की सलाह दी जाती है।
ध्यान, तनाव निकालने वाला व्यायाम और पूरा आराम पारंपरिक सुझाव हैं। किसी भी परेशानी में डॉक्टर से सलाह लें।
वृश्चिक राशि के उपाय
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और “ॐ अंगारकाय नमः” का जाप वृश्चिक राशि के लिए शुभ है। चंद्रमा नीच का होने से सोमवार को भगवान शिव की पूजा और “ॐ नमः शिवाय” का जाप मन की शांति के लिए विशेष लाभ देता है। लाल और मैरून रंग अनुकूल हैं। मसूर दाल या गुड़ का दान करें।
मंगल का रत्न मूंगा है, लेकिन इसे पहनने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें। साढ़ेसाती में धैर्य रखें, टकराव से बचें और नियमित पूजा-पाठ करते रहें।
आपकी राशि और नक्षत्र क्या है?
एक मिनट में अपनी जन्म कुंडली मुफ़्त बनाइए। आपको अपनी चंद्र राशि, नक्षत्र, लग्न और चल रही दशा दिखेगी।
मेरी मुफ़्त कुंडली बनाइएलोग अक्सर पूछते हैं
वृश्चिक राशि का स्वामी कौन है?
वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। इस राशि में चंद्रमा नीच का माना जाता है।
वृश्चिक राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
वृश्चिक राशि में विशाखा का चौथा चरण और अनुराधा व ज्येष्ठा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।
क्या वृश्चिक राशि में नीच का चंद्रमा बुरा होता है?
ज़रूरी नहीं। यह संवेदनशील और गहरे मन का संकेत है। असली फल चंद्रमा के भाव, दृष्टि और नीच भंग योग जैसी बातों पर पूरी कुंडली देखकर तय होता है।
वृश्चिक राशि की शादी किस राशि से करनी चाहिए?
परंपरा में कर्क, मीन, कन्या और मकर राशि को वृश्चिक के लिए अनुकूल माना जाता है। अंतिम फ़ैसला कुंडली मिलान से ही लें।