धनु राशि
धनु राशिचक्र की नौवीं राशि है। यहाँ धनु राशि का मतलब आपकी चंद्र राशि से है, यानी जन्म के समय चंद्रमा की राशि। पश्चिमी “Sagittarius” सूर्य राशि इससे अलग है, इसलिए आप धनु राशि के हैं या नहीं, यह कुंडली देखकर ही पता चलता है।
एक नज़र में
- स्वामी ग्रह
- गुरु
- तत्व
- अग्नि
- स्वभाव
- द्विस्वभाव
- विस्तार
- 240°–270°
- नक्षत्र
- मूल (सभी 4 पद), पूर्वाषाढ़ा (सभी 4 पद), उत्तराषाढ़ा (पद 1)
धनु राशि वालों का स्वभाव
धनु का चिह्न धनुर्धारी है और इस राशि के लोग हमेशा किसी ऊँचे लक्ष्य पर निशाना साधे रहते हैं, चाहे वह कोई सिद्धांत हो, कोई अर्थ हो या कोई दूर का सपना। गुरु के प्रभाव से ये आशावादी और आदर्शवादी होते हैं, और निराशा के बाद बड़ी तस्वीर देखकर संभल जाते हैं।
यह अग्नि तत्व की द्विस्वभाव राशि है। इनका मन आज़ादी, यात्रा, पढ़ाई और दर्शन से प्यार करता है और छोटे-छोटे बंधन इन्हें पसंद नहीं। धर्म का भाव, गुरुओं का आदर और आध्यात्मिक बातों में रुचि धनु राशि वालों में आम है।
खूबियाँ और कमज़ोरियाँ
ईमानदारी, उदारता, आस्था और हँसमुख स्वभाव धनु राशि की ख़ूबियाँ हैं। ये दूसरों को प्रेरित करते हैं, सच्ची सलाह देते हैं और मुश्किल घड़ी में भी माहौल हल्का कर देते हैं। सीखने की ललक इनमें उम्र भर बनी रहती है।
मुँहफट होना, ज़रूरत से ज़्यादा आत्मविश्वास और बेचैनी इनकी कमज़ोरियाँ हैं। ये सच तो बोलते हैं पर कैसे बोलें, इस पर कम ध्यान देते हैं, और समय से ज़्यादा वादे कर बैठते हैं। थोड़ी नरमी से बात कहना और वादे निभाना इनका सम्मान और बढ़ा देता है।
करियर और धन
गुरु की राशि होने से धनु वाले शिक्षा, अध्यापन, क़ानून, धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य, प्रकाशन, कंसल्टिंग, बैंकिंग, पर्यटन, खेल और विदेश से जुड़े व्यापार में अच्छा करते हैं। जहाँ दूसरों को राह दिखानी हो, वहाँ ये ख़ूब चमकते हैं।
इन्हें मौक़े अक्सर अच्छे मिलते हैं, पर बारीकियों में लापरवाही हो सकती है। दान और मदद अच्छी बात है, बस अपनी क्षमता से ज़्यादा उधार या दान न दें। कुंडली में गुरु की स्थिति और नौवाँ व ग्यारहवाँ भाव भाग्य और लाभ का हाल बताते हैं।
प्रेम और विवाह
प्यार में धनु राशि वाले खुले दिल के, ईमानदार और मज़ेदार होते हैं। इन्हें ऐसा जीवनसाथी चाहिए जो इनकी आज़ादी का सम्मान करे और विचार, यात्रा या आस्था में थोड़ी रुचि रखे। ज़्यादा रोक-टोक या शक इन्हें बँधा हुआ महसूस कराता है।
परंपरा में धनु का मेल मेष और सिंह (अग्नि तत्व) के साथ अच्छा माना जाता है, और तुला व कुंभ भी अनुकूल रहती हैं। विवाह का निर्णय दोनों कुंडलियों के मिलान के बाद ही लें।
स्वास्थ्य
ज्योतिष में धनु राशि का संबंध कूल्हों और जाँघों से माना जाता है, और गुरु लिवर व वज़न के कारक हैं। धनु वालों को अच्छा खाना पसंद होता है, इसलिए भारी और तला-भुना भोजन सीमित रखने और सक्रिय रहने की सलाह दी जाती है।
खुली हवा में व्यायाम, सैर और संतुलित भोजन पारंपरिक सुझाव हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर से सलाह लें।
धनु राशि के उपाय
गुरुवार गुरु का दिन है। भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और “ॐ बृहस्पतये नमः” या “ॐ गुरवे नमः” का जाप शुभ है। पीला रंग अनुकूल है। गुरुवार को चने की दाल, हल्दी, केला या पीले कपड़े का दान करें और गुरुजनों व बड़ों का सम्मान करें।
गुरु का रत्न पुखराज है, पर इसे पहनने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें। साढ़ेसाती में धैर्य और आस्था बनाए रखें और ज़्यादा आत्मविश्वास में बड़े जोखिम न लें।
आपकी राशि और नक्षत्र क्या है?
एक मिनट में अपनी जन्म कुंडली मुफ़्त बनाइए। आपको अपनी चंद्र राशि, नक्षत्र, लग्न और चल रही दशा दिखेगी।
मेरी मुफ़्त कुंडली बनाइएलोग अक्सर पूछते हैं
धनु राशि का स्वामी कौन है?
धनु राशि के स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, जो ज्ञान, धर्म और भाग्य के कारक हैं।
धनु राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
धनु राशि में मूल और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चारों चरण और उत्तराषाढ़ा का पहला चरण आता है।
धनु राशि की शादी किस राशि से करनी चाहिए?
परंपरा में मेष, सिंह, तुला और कुंभ राशि को धनु के लिए अनुकूल माना जाता है। फिर भी कुंडली मिलान ज़रूर करवाएँ।
धनु राशि वालों को कौन सा रत्न पहनना चाहिए?
धनु राशि के स्वामी गुरु का रत्न पुखराज है। इसे पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर सलाह लें।